बाँस के कोंपल – पोषक आहार

बाँस के कोंपल – पोषक आहार

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शायद आपने सोचा भी नहीं होगा कि बाँस का कोई भाग आहार और औषधीय उपयोग में भी आता होगा। आज हम सजावट तथा कुछ जगहों में घर बनाने के लिए उपयोग में आने वाले बाँस की इसी अनोखी खासियत से आपको परिचित कराना चाहते हैं।

 

कहते हैं, बाँस के कोंपल में पोटैशियम की मात्रा केले से भी अधिक होती है। पोटैशियम आपके रक्तचाप को नियंत्रित रखने तथा तंत्रिका तंत्र को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक है।

 

फाइबर की उच्च मात्रा:

इसके 100 ग्राम में 6 से 8 ग्राम फाइबर होता है। इसलिए यह पाचनतंत्र के लिए उत्तम है।

 

वसा की मात्रा कम है:

100 ग्राम कोंपल में वसा की मात्रा मात्र 0.49 ग्राम है। मोटापा कम करने के इच्छुक लोगों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।

 

एंटी-इंफ्लेमैटरी प्रकृति:

बाँस के कोंपल में एंटी इंफ्लेमैटरी गुण होते हैं और यह घाव भरने की क्रिया में तेजी लाता है। आप इसे अच्छी तरह धोकर, घाव पर इसका रस लगा सकते हैं।

 

हृदय को स्वस्थ रखता है:

बाँस के कोंपल में मौजूद फाइटोन्यूट्रिएंट और फाइटोस्टेरोल बैड कोलेस्टेरोल या एलडीएल कम करने में सहायक हैं।

 

पेट की बीमारियों का इलाज:

बाँस के कोंपल आँत के कीड़ों को मारने में सहायक हैं। अपने एंटी-इंफ्लेमैटरी गुणों तथा फाइबर की उच्च मात्रा की मौजूदगी के कारण ये पेट की गड़बड़ी ठीक करने के काम आते हैं।

 

प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं:

बाँस के कोंपल आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं और आपको स्वस्थ तथा चुस्त-दुरुस्त रखते हैं।

 

बाँस के कोंपल पकाने की विधि:                             

छिलके निकालने के बाद, इन्हें नमक मिले पानी में 20-30 मिनट उबालें। डिब्बाबंद कोंपल भी बाजार में उपलब्ध हैं, जिन्हें आप सीधे अपनी सब्जी या सूप में मिला सकते हैं।

 

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