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बच्चों के लिए पॉकेट मनी के लाभ और हानियाँ

 

क्या आप अपने बच्चों को पॉकेट मनी देना शुरु करने की सोच रहे हैं? ऐसा करने से पहले ये आलेख पढ़ें और इसके लाभ तथा हानियों को देखते हुए इस पर एक और बार विचार करें।

 

बढ़ती प्रगति और पूँजीगत अर्थव्यवस्था के युग में लोग धनी हो रहे हैं। वे अपने बच्चों पर उदारता से खर्च तो करते ही हैं, उनके हाथों में खर्च के लिए पैसे भी उदारता से देते हैं और बच्चे बिना सोचे-समझे ये पैसे खर्च करते हैं।

 

बच्चों को पॉकेट मनी देना आज का ट्रैंड भी है और कुछ हद तक जरूरत भी। लेकिन इसने अनजाने ही एक गलत प्रतिस्पर्धा को भी जन्म दिया है कि उसकी इतनी पॉकेट मनी, मेरी इतनी ही क्यों? या माँए सोचती हैं कि अगर वह अपने बच्चों को इतनी पॉकेट मनी देती है तो मेरे बच्चे को भी उतना मिलना चाहिए, नहीं तो वह स्वयं को हीन महसूस करेगा। इस तरह ज्यादा पॉकेट मनी को दिखाने के चक्कर में बच्चे अधिक खर्चीले तो बन ही जाते हैं, गाहे-बगाहे किसी खतरे को भी आमंत्रण दे देते हैं।

 

चलिए, अपने बच्चों को पॉकेट मनी देने के लाभ और हानियों पर एक नजर डालें:

 

 

 

पॉकेट मनी देने के लाभ:

1.बच्चे पैसों की कीमत समझते हैं, क्योंकि उन्हें अपनी जरूरत की चीजें स्वयं इन पैसों से खरीदनी पड़ती है। वे पैसों के मामले में एक हद तक आत्मनिर्भर हो जाते हैं।

 

2.उन्हें अपनी पॉकेट मनी एक निर्धारित समय सीमा तक चलानी है, इसलिए वह बजट बनाना और पैसों का प्रबंधन सीख जाते हैं।

 

3.इससे बच्चे अपनी प्राथमिकताएँ तय करने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेना सीखते हैं कि क्या खरीदना उनके लिए ज्यादा जरूरी है और किसे टाला जा सकता है। पैसे मिलने पर खुशी और खर्च करने का उद्देश्य समझने लगते हैं।

 

4.अभिभावकों को बच्चों की दैनिक जरूरतों, जैसे – पेंसिल, पेन आदि के लिए रोज-रोज समय देना नहीं पड़ता। बच्चे ये काम खुद कर लेते हैं।

 

पॉकेट मनी देने से हानियाँ:

 

1.पॉकेट मनी के कारण होने वाली सबसे बड़ी हानि ये है कि बच्चों में पैसों की भूख जग जाती है। इस तरह उनका ध्यान और पैसे पाने पर आ जाता है और पढ़ाई पर एकाग्र नहीं हो पाते। वे बिना सोचे-समझे उन्हें बेकार की चीजों पर खर्च करने लगते हैं, या फिर अपने पास ज्यादा पैसे जमा करने के लिए कभी-कभी इतने कंजूस हो जाते हैं कि जरूरी चीजें भी नहीं खरीदते।

 

2.किसी चीज के लिए माता-पिता से माँगना नहीं पड़े तो उन्हें पूछने या बताने की भी क्या जरूरत है, ये सोच उन्हें मार्गदर्शन के अभाव में गलत निर्णय की ओर ले जाती है। साथ ही, बिना किसी मेहनत के पैसे मिल जाने पर वे कई बार इसका मूल्य नहीं समझते।

 

3. अगर आप अपने बच्चे को ज्यादा पैसे देते हैं और उसने क्या किया, नहीं पूछते या वह नहीं बताता तो यह घातक भी हो सकता है। हो सकता है कि कोई उसे ठग रहा हो या उसके पास अधिक पैसे देखकर कोई अन्य घातक योजना बना रहा हो। आपके बच्चे को नशे का गिरोह, अपहर्ता आदि भी अपना निशाना बना सकते हैं या फिर वह गलत दोस्तों की संगत में पड़ सकता है।

ऐसा जोखिम न लें। अपने बच्चों को बहुत अधिक पॉकेट मनी न दें और हर बात पर हिसाब न लेते हुए भी, उसके द्वारा खर्च पैसों का परोक्ष रूप से मोटा-मोटा हिसाब लेते रहें।

 

इन महत्वपूर्ण सुझावों को याद रखें और अपने बच्चे को फिजूलखर्च बनने तथा उसके साथ कुछ अनहोनी होने से बचने के लिए सतर्कता पूर्वक और सोच-समझकर पॉकेट मनी की राशि तय करें। साथ ही, अपने बच्चों को पैसों के सही और गलत उपयोग के विषय में बताएँ। उन्हें ये भी बताएँ कि आजकल पैसों के लिए दुनिया में क्या-क्या गलत कार्य किए जा रहे हैं और उन्हें गलत लोगों को कैसे पहचानना तथा उनसे कैसे बचना है।

 

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