पशुओं के प्रति क्रूरता के विरुद्ध कानून

 

हर वर्ष 4 अक्टूबर को विश्व पशु दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर हम भारत में पशुओं के प्रति क्रूरता रोकने के लिए बने नियमों की जानकारी दे रहे हैं।

 

1. अगर कोई व्यक्ति
 किसी पशु को पीटता है, पैर से मारता है, इस पर अत्यधिक वजन लादता है, अत्यधिक तेज गति से या अत्यधिक दूरी तक चलने के लिए बाध्य करता है, उसे यातना देता है या उस पर किसी अन्य प्रकार का अत्याचार करता है, जिससे उसे अनावश्यक दर्द या तकलीफ होती है, या कोई व्यक्ति पशु के स्वामी की अनुमति से पशु के साथ ऐसा करता है; या

 
 कोई व्यक्ति चलने-फिरने में अक्षम, घाव, फोड़ा या अन्य बीमारी, उम्र आदि की वजह से काम में लगाने के अयोग्य पशुओं से काम करवाता है, या पशु का स्वामी उससे ऐसे काम करवाने की अनुमति देता है;

 
 किसी पशु को जानबूझकर और अनावश्यक रूप से कोई घातक दवा या अन्य पदार्थ देना या देने का प्रयास करता है, या

 
 किसी वाहन में या उसके ऊपर पशुओं को इस प्रकार ले जाता है. जिससे उसे अनावश्यक तकलीफ और दर्द हो,

 
 किसी पशु को ऐसे पिंजरे में रखता है, जो उसकी ऊँचाई, लंबाई और चौड़ाई को देखते हुए उसे चलने-फिरने के लिए पर्याप्त बड़ा नहीं है,

 
 बहुत लंबे समय तक अनावश्यक रूप से जंजीर अथवा रस्सी में बाँधकर रखता है या जंजीर बहुत छोटा अथवा बहुत भारी है,

 
 अपने पालतु पशु के शारीरिक व्यायाम की आवश्यकता को नजरअंदाज करता है या उसे जंजीर में बँधा रहने की आदत होने पर अत्यधिक व्यायाम करवाता है या छोटे पिंजरे में रखता है, या

 
 अपने पालतु पशु के लिए पर्याप्त भोजन, पानी या सही आवास की व्यवस्था नहीं करता, या

 
 बिना किसी उल्लेखनीय कारण के अपने पशु को ऐसी परिस्थिति में छोड़ देता है कि उसे भूख-प्यास या अन्य किसी कारण से तकलीफ हो, या

 
 जानबूझकर अपने ऐसे पालतु पशु को घर से बाहर दूर तक जाने देता है, जिसे कोई संक्रामक रोग हो, या बिना किसी सही कारण के किसी बीमार या विकलांग पशु को किसी सड़क पर मरने के लिए छोड़ देता है, या

 
 किसी ऐसे पशु को बेचने का प्रस्ताव देता है या जबरन अपने स्वामित्व में रखता है, जो अंग-भंग, भूख, प्यास, कम जगह में अधिक पशुओं की भीड़ या अन्य किसी दुर्व्यवहार से पीड़ित हो, या

 
 जो व्यक्ति किसी पशु का अंग-भंग करता है या दिल में जहर के इंजेक्शन लगाकर उसे मार देता है (गली के कुत्ते आदि को) या किसी अन्य प्रकार से अनावश्यक क्रूर व्यवहार करता है, या

 
 केवल मनोरंजन के उद्देश्य से,

 
• पिंजरे में बंद कर या कैद कर रखता है (जिसमें किसी पशु को बाघ या अन्य जानवर का शिकार बनने के लिए उसके पिंजरे में बांध कर रखता है), या

 
• पशुओं का आपसी युद्ध आयोजित करता है या किसी पशु को शिकार के रूप में प्रस्तुत कर या ऐसे स्थान का प्रस्ताव कर पैसे इकट्ठा करता है, या

 
• किसी शूटिंग मैच या प्रतियोगिता का आयोजन या प्रचार करता है, जिसमें पशुओं को पिंजरे से निकालकर शूट किया जाता है,

 

 

वह पहले अपराध में 10 रूपये से 50 रूपये तक के आर्थिक दंड का भागी होगा और पहले अपराध के तीन वर्ष के भीतर ऐसा कोई दूसरा अपराध करने पर 25 रूपये से सौ रुपये तक के आर्थिक दंड या तीन महीने की कैद अथवा दोनों का भागी होगा।

 

 

अगर पशु का स्वामी उसे सही व्यायाम कराने और देखभाल करने में विफल रहता है तो इन अपराधों के दृष्टिकोण से दोषी पाया जाएगा।

 

 

अगर स्वामी केवल व्यायाम न करा पाने और सही देखभाल में विफल रहने का दोषी पाया जाता है तो उसे आर्थिक दंड के विकल्प के बिना कैद नहीं होगी।

 

 

उपर्युक्त कोई भी खंड निम्नलिखित स्थितियों में लागू नहीं होता –

 

• मवेशियों का सींग काटना, उनका बधियाकरण या ब्रांडिंग अथवा नकेल डालना (नाक में रस्सी डालना) आदि स्थितियों में,
• लीथल चैम्बर में किसी अन्य अनुशंसित तरीके से आवारा कुत्ते को मारना,
• किसी कानून के अधीन किसी पशु को मारना

 
• मनुष्य द्वारा खाए जाने वाले किसी पशु का वध, जब तक कि वध के दौरान पशु को अनावश्यक दर्द या तकलीफ से न गुजरना पड़े।

 

 

2. फूका या दुम देव की सजा: अगर कोई व्यक्ति गाय या किसी अन्य दुधारू मवेशी का दूध बढ़ाने के लिए उसे फूका करवाता है (जिसमें किसी भी प्रकार का ऐसा इंजेक्शन देना शामिल है, जिससे उस पशु के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचता है) या अपने पशु के साथ ऐसी गतिविधि की अनुमति देता है, तो उसे एक हजार रुपये तक का आर्थिक दंड या दो वर्ष तक की कैद या दोनों हो सकती है और पशु को सरकार को सौंपना पड़ सकता है।

 

 

3. कष्ट में पड़े जंतु को सुलाना (मारना) – अगर न्यायालय पाता है कि खंड 1 के अंतर्गत हुए किसी अन्यायपूर्ण दुर्व्यवहार की वजह से कोई पशु इतने कष्ट में है कि उसे जीवित रखना और अधिक क्रूरता होगी तो न्यायालय उसे मारने का आदेश दे सकता है और उसे इस कार्य के लिए किसी उपयुक्त व्यक्ति को सौंप सकता है, जो उसे जल्द से जल्द मृत्यु की नींद सुला सके। इस कार्य में आने वाला खर्च पशु के अपराधी स्वामी से आर्थिक दंड के रूप में वसूल किया जाएगा,

 

 

बशर्ते कि स्वामी की स्वीकृति के बिना, ऐसा कोई आदेश तब तक नहीं दिया जाएगा, जब तक कि उस क्षेत्र के प्रभारी वेटनरी ऑफिसर इस बात के लिए साक्ष्य न दें।

 

 

अगर किसी मजिस्ट्रेट, पुलिस आयुक्त या पुलिस महानिरीक्षक को लगता है कि किसी पशु के साथ ऐसा अपराध हुआ है कि उस पशु को जीवित रखना और अधिक क्रूरता होगी तो वह उस पशु को तुरंत मारने का आदेश दे सकता है।

 

 

कॉन्स्टेबल से ऊँचे पद का कोई भी पुलिस अधिकारी या राज्य सरकार द्वारा प्राधिकृत कोई भी व्यक्ति यदि पाता है कि कोई पशु इतना बीमार है या उसे इतनी चोट पहुँची है अथवा उसकी शारीरिक स्थिति ऐसी है कि उसे जीवित रखना और अधिक क्रूरता होगी तो पशु के स्वामी के अनुपस्थित रहने अथवा उसके द्वारा अनुमति नहीं दिए जाने पर उस क्षेत्र के वेटनरी अधिकारी को बुलाया जा सकता है और अगर वेटनरी अधिकारी इस बात की पुष्टि कर दे कि पशु जानलेवा रूप से घायल हुआ है या इतना घायल अथवा बीमार है कि उसे जीवित रखना उस पर क्रूरता होगी तो पुलिस अधिकारी या प्राधिकृत व्यक्ति, जैसा भी मामला हो, मजिस्ट्रेट से अनुमति लेकर उस पशु को अनुशंसित तरीके से मरवा सकता है।

 

 

किसी मजिस्ट्रेट के आदेश से पशु को मारने के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं होगी।

 

 

 

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