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अलविदा पवित्र रमजान

 

इस्लामिक कैलेंडर के सबसे पवित्र माने जाने वाले महीने रमजान का अंतिम शुक्रवार को अलविदा के नाम से जाना जाता है।

 

दुनिया भर में मुस्लिम लोग रमजान के पूरे महीने दिन में रोजा अर्थात उपवास रखते हैं। यह उस सर्वशक्तिमान की कृपा प्राप्त होने का महीना है। माना जाता है कि इसी महीने जन्नत से धरती पर पवित्र कुरान को धरती वासियों का मार्गदर्शन करने भेजा गया था। कुरान जीवन में सही राह पर चलने और सही आचरण करने की शिक्षा देता है।

 

अलविदा या जुम्मातुल-विदा के दिन रोजा रखने वाले उदास हो जाते हैं क्योंकि उनका प्यारा महीना रमजान जा रहा होता है।

 

“मुस्लिम रमजान को बहुप्रतीक्षित अतिथि की तरह मानते हैं, जिसे खुद अल्लाह ने भेजा होता है। अलविदा के दिन रोजा रखने वालों को ऐसा लगता है, मानो प्रकृति भी रमजान के बीतने पर उदास है।”

 

इस दिन नमाज पूरी श्रद्धा के साथ अदा की जाती है और मस्जिदों में पेश इमाम साहब खास खुतबा अदा करते हैं।

 

लोगों को पूरा विश्वास होता है कि इस दिन नमाज के बाद माँगी जाने वाली हर दुआ पूरी होती है, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान इस दिन 30 दिनों तक के रोजा का पुरस्कार देते हैं।

 

अलविदा का अगला दिन, अर्थात शनिवार का दिन बहुत खास है। यह रोजा का 27वां दिन है और ‘लैलात-उल-कादर’ का रोजा बहुत महत्वपूर्ण होता है। अंधेरी मुंबई के प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान मौलाना साजिद हुसैन का कहना है – “जब पवित्र कुरान पैगम्बर मुहम्मद के सामने प्रकट हुआ, मुहम्मद की उम्र 23 वर्ष और 3 महीने की थी और जब-जब यह चमत्कार हुआ, वह लैलात-उल-कादर की रात थी। इस दिन प्रार्थना करने पर 100 महीनों या 83 वर्ष और चार महीनों की प्रार्थना का फल मिलता है। इस दिन रोजा रखना तथा कुरान पढ़ना जरूरी माना जाता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि कोई व्यक्ति इस दिन रोजा रखता है तो पूरे महीने रोजा छोड़ सकता है।”

 

कोलाबा के एक मदरसा दुआल उलूम हनफिया रिजविया के उपाध्यक्ष कारी नियाज अहमद बताते हैं, “लैलात-उल-कादर के दिन पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ अदा की गई हर दुआ, हर नमाज लोगों के स्वास्थ्य और व्यक्तिगत प्रसन्नता के लिए, दुनिया में शांति और सौहार्द के लिए होना चाहिए। यह रात रमजान की सबसे महत्वपूर्ण रात है।”

 

Oneworldnews सभी को अलविदा मुबारक और ईद-उल-फितर की शुभकामना देता है। इंशाल्लाह अलविदा आपके जीवन में खुशियों की एक नई सुबह लाए और सभी मुश्किलों, दुखों, तकलीफों से बचाए। जुमातुल-विदा मनाएँ और सर्वशक्तिमान, सृजनकर्ता के सामने प्रार्थना करें कि हमारे, आपके, हम सबके लिए आगे सब शुभ हो।

 

रहमतों का महीना –रमजान, अलविदा!

 

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